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देवर ने मेरी चूत का सूनापन खत्म कर दिया

Devar ne meri chut ka sunapan khatm kar diya:

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मेरा नाम आशा है और मैं 25 वर्ष की युवति हूं। मै एक कंपनी में जॉब करती हूं और मुझे जॉब करते हुए 6 महीने से ऊपर हो चुके हैं। मैं पहले जॉब नहीं कर रही थी क्योंकि मैं घर पर ही रहती थी लेकिन फिर मुझे लगने लगा कि घर पर बैठकर कुछ होने वाला नहीं है इसलिए मैंने जॉब कर लिया और जब मैंने जॉब करना शुरू किया तो मुझे अब बहुत ही अच्छा लगता है क्योंकि मेरा समय भी कट जाता है और मेरे पास कुछ पैसे भी आ जाते हैं। घर में मैं बोर हो जाती थी और मेरे साथ की जितनी भी लड़कियां हैं उन सब की शादी हो चुकी है और वह जब भी वह मुझे मिलती तो अपने पति के बारे में बताया करते थे। मैं बहुत ही खुश होती थी जब उन लोगों की बातें सुना करती थी और मुझे ऐसा लगता था जैसे वह लोग कितने खुश हैं कहीं ना कहीं मैं भी यह सोचा करती थी कि जो मेरा जीवन साथी होगा वह किस तरीके का होगा। एक दिन मेरे भैया मुझे कहने लगे कि हमने तुम्हारे लिए एक लड़का देख लिया है।

मैंने उन्हें कहा कि आपने मुझसे इस बारे में कुछ भी नहीं कहा, तो वह कहने लगे कि पापा ने ही तुम्हारे लिए लड़का देखा है और मैंने तो तुम्हें यह बात बता दी। पापा तो तुम्हें यह बात बताने वाले नहीं थे और जब तुम लड़का देखती तभी तुम्हें पता चलता। मुझे इस बात से बहुत ही गुस्सा आ रहा था और मैं सोच रही थी कि मेरे पापा ने मुझसे एक बार भी नहीं पूछा, वह कम से कम मुझसे पूछ तो लेते कि तुम्हे किस प्रकार का लड़का चाहिए और मुझे पसंद है भी या नहीं। मैंने जब इस बारे में अपने पापा से बात की तो वह कहने लगे कि वह लोग बहुत ही अच्छे घर से हैं इसलिए मैंने तुम्हें बताना सही नहीं समझा और सोचा कि जब वह लोग तुम्हें देखने आएंगे उसके बाद ही मैं तुम से इस बारे में बात करूंगा। मैं अपने पापा से बहुत ज्यादा गुस्सा थी। जब लड़के वाले मुझे देखने आए तो लड़का देखने में तो अच्छा ही लग रहा था और उसके साथ में उसकी मम्मी पापा और उसका छोटा भाई भी आया हुआ था। अब मेरी सगाई हो चुकी थी और उसके कुछ समय बाद ही मेरी शादी हो गई। मेरे पति का नाम कल्पेश है और वह प्रॉपर्टी का काम करते हैं लेकिन जब मुझे उनके साथ में काफी समय हो गया तब मुझे उनकी आदते पता चलने लगी। वह बहुत ही ज्यादा शराब पीते थे और सब लोगों से झगड़ा भी करते थे।

मुझे इस बात का बहुत ही बुरा लगता था लेकिन मैंने उन्हें कुछ भी नहीं कहा क्योंकि मेरी नई नई शादी हुई थी इसलिए मैं उन्हें कुछ भी नहीं कहना चाहती थी लेकिन अब मेरे सर के ऊपर पानी चला गया और मैंने एक दिन उन्हें कह ही दिया कि आप इतनी शराब क्यों पीते हैं, जब घर का माहौल खराब हो रहा है तो आपको शराब नहीं पीनी चाहिए। उस दिन वह बहुत ज्यादा गुस्सा हो गये और उन्होंने मुझ पर हाथ उठा दिया और जब उन्होंने मुझ पर हाथ उठाया तो मैं बहुत जोर जोर से रोने लगी और मुझे बहुत ही दुख हुआ क्योंकि मैंने कभी भी कल्पेश के बारे में ऐसा नहीं सोचा था कि वह इस प्रकार से मेरे ऊपर हाथ उठा देंगे लेकिन जब उन्होंने मुझ पर हाथ उठाया तो मुझे बहुत ही बुरा लगा। उस दिन से मैं उनकी कभी भी इज्जत नहीं करती थी और जब यह बात मेरे देवर को पता चली तो वह बहुत ही गुस्सा हुए। मेरे देवर बहुत ही पढ़े-लिखे थे और वो एक कॉलेज में प्रोफेसर हैं। मेरे देवर का नाम दिनेश है। वह बहुत ही समझदार हैं और उन्होंने कल्पेश को बहुत समझाया लेकिन कल्पेश बिल्कुल भी नहीं समझ रहे थे, दिनेश ने कहा कि यदि तुम्हारी ऐसी हालत रही तो एक ना एक दिन तुम्हें पापा घर से भी निकाल देंगे लेकिन उनकी समझ में कुछ भी नहीं आ रहा था। वह जब भी घर आते तो मुझसे झगड़ा किया करते थे। दिनेश उन्हें बहुत समझाते थे लेकिन उन्हें बिल्कुल भी समझ नहीं आता था। यह बात मेरे घर वालों को पता चली तो वह बहुत ही दुखी हुए, मैंने अपने पापा से कहा कि यदि आप मुझसे पहले ही पूछ लेते तो मैं शायद आपको कुछ समय और रुकने के लिए कह देती लेकिन आपको बहुत ही जल्दी लगी हुई थी इसीलिए आपने मेरी शादी करवा दी और अब कल्पेश मुझसे बिल्कुल भी बात नहीं करता है और ना ही मैं उनसे बात करती हूं। फिर भी मेरे पापा को यह बात समझ नहीं आ रही थी कि कल्पेश और मेरे बीच में बहुत ज्यादा झगड़े होने लगे हैं। वो कहने लगे कि तुम दोनों मैनेज कर लो, उसके बाद मैंने फोन काट दिया और फिर मैंने कभी अपने घर पर फोन नहीं किया। मुझे अपने घर वालों को देख कर बहुत ही गुस्सा आता था।

मुझे कोई भी नहीं समझ पा रहा था लेकिन दिनेश हमेशा ही मुझे बहुत सपोर्ट किया करते थे और वह कहते थे कि भाभी आप चिंता मत कीजिए, एक न एक दिन कल्पेश को समझ जरूर आ जायेगी लेकिन उन्हें कभी भी समझ नहीं आने वाली थी और वह हमेशा ही शराब पीकर घर पर शोर शराबा किया करते थे। उनसे अब घर में कोई भी बात नहीं करता था और उनकी इमेज पूरी तरीके से धूमिल हो चुकी थी। वह सुबह घर से खाना खा कर निकल जाते और रात को लेट से घर आते थे और कभी कबार तो वह कई दिनों तक घर भी नहीं आते थे लेकिन मुझे भी अब कोई फर्क नहीं पड़ता था क्योंकि मेरे दिल में कल्पेश के लिए बिल्कुल भी कोई जगह नहीं थी। मुझे उनसे बात करना भी बिलकुल पसंद नहीं था और ना ही मुझे उनके साथ रहना अच्छा लगता था लेकिन यह मेरी मजबूरी ही थी कि मुझे उनके साथ रहना पड़ रहा था क्योंकि मेरे घर में मैं किसी से भी बात नहीं करती थी। मैं अंदर से बहुत टेंशन में थी।

एक दिन दिनेश मुझसे बात कर रहे थे और वह कह रहे थे कि आप बिल्कुल भी चिंता मत कीजिए। मैंने उन्हें कहा कि चिंता की तो बात ही है मेरी तो पूरी जवानी उन्होंने खराब कर दी ना तो वह मुझे प्यार दे पाते हैं और ना ही मेरी भावनाओं को समझ पा रहे हैं। जब मैंने उन्हें यह सब कहा तो उन्होंने मुझे अपने गले लगा लिया और कहा कि भाभी आपकी कौन सी इच्छा पूरी नहीं हो रही है। मैंने उन्हें कहा कि मेरी चूत कितने दिनों से सूनी पड़ी है उस कल्पेश ने कब से नहीं मारा। जब मैंने उनसे यह बात कही तो उन्होंने तुरंत ही अपने लंड को बाहर निकालते हुए मेरे मुंह में डाल दिया और मैंने उनके लंड को बहुत ही अच्छे से चूसना जारी रखा। मैं उनके लंड को बड़े ही अच्छे से चूस रही थी और वह बहुत ही खुश हो रहे थे।

उन्होंने भी मेरे स्तनों को बहुत ही अच्छे से चूसा तो मेरी योनि के अंदर से बहुत ज्यादा पानी निकलने लगा था। उन्होंने मुझे घोड़ी बना दिया और मेरी योनि के अंदर जैसे ही अपने लंड को डाला तो उनका लंड बहुत ही बड़ा था और जैसे ही मेरी चूत में उनका लंड गया तो मेरे मुंह से आवाज निकल गई। मैं बड़ी मादक आवाज निकालने लगी मेरे मुंह से सिसकारी निकल जाती जब वह मुझे धक्का देते। वह इतनी तेजी से मुझे झटके दिए जा रहे थे कि मुझे बड़ा ही अच्छा महसूस हो रहा था और मैं बहुत ही खुश हो रही थी। मैं भी अपनी चूतडो को उनसे मिलाई जा रही थी। मैं अपने चूतड़ों को इतनी तेजी से दिनेश से मिला रही थी मुझसे बिल्कुल भी रहा नहीं गया और मैं झड़ गई क्योंकि कई दिनों बाद मैने सेक्स किया था। लेकिन दिनेश अभी भी मुझे चोदने पर लगे हुए थे उनका लंड मेरे पूरे पेट तक जा रहा था और मुझे बड़ा ही अच्छा लग रहा था। कुछ देर बाद उनका भी झड गया उन्होंने अपने लंड को मेरी चूत से बाहर निकालते हुए मेरे मुंह के अंदर डाल दिया। मैंने उनके लंड को बहुत ही अच्छी चूसना जारी रखा। मैं उनके लंड को चूसे जा रही थी उन्हें बहुत ही अच्छा लग रहा था और वह कह रहे थे कि आप तो मेरे लंड को बहुत अच्छे से चूस रहे हैं। मुझे बहुत ही अच्छा लग रहा है जब आप इस प्रकार से मेरे लंड को अपने मुंह के अंदर तक ले रहे हैं। कुछ देर बाद उनका माल दोबारा से मेरे मुंह के अंदर गिर गया और मैंने वह पूरा अपने अंदर तक ले लिया। उसके बाद से दिनेश मुझे हमेशा ही चोदते हैं और मेरी इच्छाओं को वही पूरा करते हैं।


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