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मेरे रसीले लंड का स्वाद मेरे दोस्त की बीवी ने लिया

Mere rasile lund ka swaad mere dost ki biwi ne liya:

नमस्कार दोस्तों मेरा नाम निखिल कश्यप है | मैं हरिद्वार उत्तराखंड का रहने वाला हूँ  मेरी उम्र 21 साल है | और मेरा इस साल ग्रेजुएशन का लास्ट साल है | मेरे घर में मेरे मम्मी पापा और एक छोटा भाई और एक बहन जिसकी पिछले ही साल शादी हो गयी थी | मेरे पापा एक  बहुत बड़े जमीदार है |और मम्मी घर पे ही रहा करती है | मेरा एक दोस्त है जिसका नाम सुनील है | वो एक पुलिस वाला है | तो वो ज्यादातर घर से बाहर ही रहता था | चलिए दोस्तों मैं ज्यादा बकवास न करता हुआ आगे बढ़ता हूँ|

ये बात उस समय की है जब मैं और मेरा दोस्त सुनील बचपन से लगाकर अभी तक एक की सात खेले-कूदे लेकिन वो मेरे से 2 साल बड़ा था| उम्र में भी और कॉलेज में भी | वह अपननी पढाई पूरी करने के बाद पुलिस में भरती हो गया | फिर उसने 1 साल बाद सादी कर ली |जिस लड़की से मेरे दोस्त ने सादी की थी वह मेरे ही साथ मेरे कॉलेज में पढ़ती थी | वह बहुत सुन्दर तथा बहुत अच्छी लगती थी | वह मुझे बहुत पसंद थी | जब हम लोगो ने अपनी पढाई पूरी कर ली तो उसके बाद मैं  नॉएडा चला आया बैंकिंग की तैयारी करने और वह अपनी पढाई छोड़ चुकी थी | क्योंकि उसके माँ-बाप ने उसकी सादी तय कर दी थी | जब मुझे यह जानकारी प्रयाप्त  हुई तो मुझे बहुत दुःख हुआ | लेकिन जब मुझे पता लगाया की उसकी शादी कहाँ से और किस से तय हुई है तो पता लगा की उसकी सादी मेरे ही दोस्त सुनील से तय हुई थी | तो मुझे थोडा दुःख तो जरुर हुआ लेकिन बाद में खुसी भी हुई | कि चलो आखिर उसकी शादी मेरे से नहीं तो मेरे दोस्त के साथ हो रही  है |

जब मेरे दोस्त की शादी आई तो मैं तथा मेरे ओर साथ के दोस्तों ने अपने दोस्त की शादी में खूब नाचा | हम लोगो ने पूरी रात खूब डांस किया और फिर अपने दोस्त तथा उसकी धरम पत्नी  के साथ में मिलकर खाना खाया | सुनील मेरा बहुत अच्छा  दोस्त था | वो मुझे बहुत मानता था,और मैं भी उसे बहुत मानता हूँ | मेरा दोस्त घर का अकेला था तथा घर में अब उसकी माँ और अब उसकी पत्नी | उसके पापा ख़त्म हो चुके थे वह बेचारा बहुत परेसानियो से गुजरा था | उसके पापा के मर जाने के बाद उसके घर की इस्थित बहुत घराब हो गयी थी | जैसे-तैसे वह मेहनत करके पुलिस में भर्ती हुआ था | अब उसकी चुटी ख़त्म हो चुकी थी वह अब वापस ड्यूटी जा रहा था | मैं उसको छोड़ने बस अड्डे गया हुआ था | बस में बैठने से पहले उसने मुझसे कहा की देख भाई मेरे घर में कोई ऐसा नही जो पूरी तरह से हर किसी चीज में सछम हो | तो मेरे भाई मेरे घर का ख्याल रखना | मैंने हाँ कहते हुए उसे बस में अंदर बैठाल दिया | और वापस घर आ गया | मेरी कुछ दिन छुट्टिया और थी |

मैं अक्सर सुनील के घर जाया करता था | मेरी और उसकी पत्नी की जान पहचान पहले से थी | मैं उनके घर का सामान भी ला दिया करता था | धीरे-धीरे समय बीता | एक दिन सुनील की पत्नी का फोन आया की घर पर आ जाओ मा जी बुला रही है | मैं अपना काम ख़त्म करके उनके घर पहुंचा | तो देखा की माँ जी तो घर पे  थी नही सिर्फ वो अकेले थी | मेरे पूछने पर कहा की माँ जी अभी बाहर चली गयी है आप बैठो में पानी लेकर आती हूँ | पानी का गिलास देते हुई वो मेरे साइड में बैठ गयी | पानी पीते हुये मैंने पूछा कोई काम था क्या जो माँ जी ने याद किया था | तो उसने मुश्कुराते हुए कहा की केवल काम ही के लिए बुलाया जाता है अरे बैठो कुछ बाते करो मैं अकेले बोर हो जाती हूँ | आप तो बस काम के समय ही आते हो | मैं  थोडा नर्वस हुआ | फिर मुस्कुराते हुए बोला की नही ऐसी बात नही है, बस थोडा सा काम रहता है घर पे इसीलिए नहीं आ पाता हूँ बस और कोई बात नही है | बात करते हुए वह धीरे-धीरे मेरे तरफ बढ़ने लगी | फिर एक दम वह मेरे करीब आ गयी मैं चक्कर में पड़ गया | थोड़ी देर बाद वह अपना अंग मेरे अंग में भिड़ा रही थी | मेरे सरीर के सारे रोयें खड़े हो चुके थे | मुझे उसके हालात कुछ ठीक नही लग रहे थे | उसने जब मेरा हाथ पकड़ने की कोशिस की तभी माँ जी आ गयी और वह अन्दर चली गयी | कहो माँ जी ने देखा नही था | मैंने माँ जी से हाल-चाल ले के वापस घर चला आया |

मैं घर पर आके अपने कमरे में लेट गया जाके और उसकी हरकत के बारे में सोंचने लगा | मन मेरा भी करता था उसके साथ एक रात सोके उसकी रात भर चुदाई करू पर मैं ये सब ठीक नही समझता था | क्योकि वह मेरे दोस्त की बीवी थी |  मेरा दोस्त मुझपे बहुत बिस्वास करता था | और मैं उसके बिस्वास को तोडना नही चाहता था | मै अपने आप को कण्ट्रोल किआ करता था | लेकिन पता नही उसको मेरे लंड का स्वाद लेना ही था | वह तरह–तरह के बहाने करके मुझे अपने घर बुलाया करती थी | कभी काम होता था तो कभी नही | अब घिरे–धीरे बहुत हो चूका था | मैंने अपने आप को बहुत रोका की मेरे से ये गलत काम न हो | पर वो मुझे अपने घर बुला के बाते करते–करते मेरे सरीर को छूके मुझे गरम किआ करती थी | मैं अपने आप को न चाहते हुए रोका करता था | लेकिन कभी-कभी माँ जी घर में होती थी तो कभी काम वाली बाई |

एक दिन की बात है माँ जी को अपने माइके जाना था,तो मेरे दोस्त की बीवी ने मुझे फोन किआ और बहुत ही प्रसन्न मन से बोली आज ऊँट फसा है पहाड़ के नीचे | मैं  कुछ समझ नही पाया | तो मैंने कहा की कुछ समझा नही मतलब | तो वह बोली की कुछ नही माँ जी आपसे बात करना चाहती है | माँ जी से बात करके मैं उनके घर पहुंचा | तो देखा की माँ जी को कहीं जाना था वह बैग ले के गेट पर कड़ी थी | मैंने  उनके हाथ से बेग लेते हुए पूंचा की कहाँ जा रही हो माँ जी तो उन्होंने कहा की बेटा अपने माइके जा रही हूँ | मैंने तुरंत ही ऑटो वाले को बुलाया और माँ जी के साथ ही उन्हें बस अड्डे तक छोड़ने चला गया |रास्ते में माँ जी ने मुझसे कहा की में 4-5 दिन    के बाद ही घर आउंगी बेटा तो तुम ऐसा करना की मेरे ही घर पे सो जाया करना | क्योकि बहु अकेली ही है वह अकेले परेसान हुआ करेगी तो तुम बाहर वाले कमरे में सो जाया करना | यह सुनकर मैं आस्च्रित हुआ फिर बाद में खुस भी हुआ |क्योकि मेरी बर्दास्त करने की सीमा कतम हो चुकी थी | अब मैंने ठान लिया था की एक अच्छा सा मौका पाके मैं अपनी दोस्त की बीवी की चूत की गर्मी शांत करूँगा | तो फिर मैंने माँ जी को उनके गावं जाने वाली बस में बिठवा दिया उसके बाद में घर चला गया | जब माँ जी को छोड़ के अपने दोस्त के घर गया तो मैं सराफत से जाकर गेस्ट रूम में लेट गया जाके | लगभग 1 घंटे बाद मेरे दोस्त कि बीवी मेरे कमरे में चाय ले के आई | मैंने उसके हाथ से चाय ले ली | और वह मेरे ही पास बैठ गयी और अपनी हरकते सुरु करने लगी | जब तक मैंने अपनी चाय पी न ली तब तक मैं चुप रहा | मैं पूरी तरह से गरम हो चूका था मैंने ठान लिया था की अब सीमा पार हो चुकी है | अब कुछ करने का समय आ गया था वरना वो मुझे वो गांडू समझने लगती | जैसे ही मेने अपनी चाय ख़त्म की मैं बिना किसी अंजाम को सोंच के मैने उसका हाथ पकड़ लिया और फिर मैंने उसके होंठ अपने मुह में रख लिया | और मैं जोर-जोर से चूसने लगा मुझे बहुत मजा आ रहा था और साथ-साथ ही उसे भी | क्यों की उसे चुदाई करवाए हुए बहुत समय हो चूका था | और मैं भी इस मामले में एकदम नया था | मुझे ज्यादा ज्ञान नही था इस फील्ड में | जब में उसके होंठो को चूस रहा  था तब उसके मुंह से उन्ह उहं हाहा ह्ह्हाआ ओह्ह्ह उन्ह उहं ओह्ह्ह हहाह्ह्हा  वोह  आह आह्ह आ ओह्ह ओह्ह ओह्ह ओह्ह शश श श श  आह आः आः उन्ह उहं उन्ह उन्ह ओह्ह ऊह्ह्हो ऊह्ह ओहुंह उहंह उन्ह उनहू उह उह ऊह्ह उन्ह उन्ह उन्हं  उन ह उ नह  कि सिस्करिया जोरो से आ रही थी | जब मैंने किस्सिंग सीन ख़त्म कर लिया तो उसके बाद में वो मेरे एक-एक करके सारे कपडे उतारने लगी | मैं पूरा नंगा हो चूका था | और उसने अपने भी कपडे उतार दिए थे  उसके बाद में उसने मेरे लंड को अपने मुहं में ले लिया और मैं मजा लेते हुए उन्ह उन्ह हहहः ओह्ह उहं उहन हहहः ओह्ह्ह ओह्ह्ह की सिस्कारिया निकाल रहा था और उसके बाद में मैंने उसके चूत में अपना लंड दाल के चोदने लगा और वह आह आह आह आह ओह्ह ओह्ह उन्ह उन्ह उन्ह इह्ह इह्ह इह उह्ह उह्ह उह्ह की सिस्कारिया निकाल रही थी | इस तरह से मैंने उसकी पूरी रात चोदी | जब तक माँ जी नही आई मैंने रोज उसकी चुदाई की |और अपने रसीले लंड का स्वाद उसे दिया | दोस्तों मेरी भी छुट्टिया ख़त्म होने वाली थी और मैं भी वापस जाने वाला था | आज भी दोस्तो मैं जब भी जाता हूँ तो उसे अपने लंड का स्वाद मौका पाके देता रहता हूँ |

तो दोस्तो ये थी मेरी कहानी आशा करता हूँ की आप लोगो को अच्छी लगेगी | क्योकि ये दोस्तों मेरी पहली कहानी थी जो मेने लिखी  है |


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